धारा 370 को समाप्त करना कितना सही ?
कश्मीर भारत के सिर का ताज है और यह भी बाकि राज्यों की तरह भारत का
एक राज्य है।धारा 370 के तहत दिए गए
विशेष अधिकार ही इसे बाकि राज्यों से
अलग करते हैं। क्या आपको नहीं लगता
जो नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स
की परक्रिया असम में चली वो कश्मीर में
भी चली होती तो आतंकवाद वहां अपनी
जड़ न जमा पता।
14 फरवरी 2019 निश्चित रूप से पुलवामा में जैश - ए - मोहम्मद द्वारा कराया गया आतंकी हमला कोई सामान्य अचानक हुआ क्रियाकलाप नहीं है। इसके पीछे एक लम्बी योजना दिखाई देती है। इसी प्रकार का हमला पिछले साल उड़ी में भी हुआ था। ध्यान देने की बात यह है कश्मीर अथवा देश अन्य हिस्सों में हो रहे आतंकी हमलों में कश्मीरी युवक ही अधिक सक्रीय दिखाई दे रहे हैं इससे यह स्पष्ट हो रहा है की उनके मन में भारतीयता से अलग कश्मीरियत की बात बैठा दी गयी है। ऐसे युवकों में राष्ट्रप्रेम है ही नहीं पाकिस्तान में बैठे आतंकी संगठनों के आका धर्म की आड़ में और भारत विरोधी बातों के जरिये उनकी सोच बदल रहे है। भारत को अब यह समझना चाहिए के पाकिस्तान और वहां बैठे आतंकवाद के सरपरस्त किसी बातचीत के हकदार नहीं हैं। अब उन्हें ताकत से कुचलना एकमात्र विकल्प है। कश्मीरी युवक जो भारतीय सेना पर पथराव करने है वो नहीं जानते की वो आतंक के आकाओं की वो फुलझड़ी हैं जिन्हे वो जलते हैं और फेंक देते हैं। और अगर उनको ये लगता है की पथराव करकर वो कश्मीर को पाकिस्तान का हिसा बना लेंगे तो मुझे लगता है की उनकी बुद्धि भ्रष्ट हो गयी है क्योंकि भारत कभी भी अपने ताज को सिर से अलग नहीं होने देगा और अगर कश्मीरी जनता को लगता है की भारतीय सेना उन्हें सुरक्षित नहीं रख सकती तो वो पाकिस्तान जा सकतें हैं देखते हैं की वहां तुम कितने सुरक्षित रह सकते हो। अब समय है की कश्मीर की जनता ये तय करे की वो भारतीय है या नहीं अगर वो भारतीय हैं तो सेना पर पथराव बंद करे और साथ ही साथ आतंकियों का साथ देना बंद करे। कुछ दिन पहले जो हमारे सेना के जवान शहीद हुए है और जो आये दिन हमारे जवान शहीद हो रहे हैं इसको देखते हुए लगता है की अब वो समय आ गया है की धारा 370 को समाप्त कर दिया जाना चाहिए और कश्मीर को भी बाकि राज्यों की तरह रखा जाना चाहिय और अगर कश्मीरी जनता को यह सही लगता है तो वो कश्मीर में रह सकते है नहीं तो वो पाकिस्तान के लिए रवाना हो लें।
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